रविवार, 6 मई 2012

ये सब सच है गीत नहीं है - ye sab sach hai geet nahee hai Dr kumar Vishwas




तडपन, पीर, उदासी, आँसूं,

बेचैनी, उपवास, अमावस,

अजब प्रीत का मौसम मन में पतझर है, 
नयनों में पावस, 
इस अलमस्त जुगलबंदी से बाहर, 
कुछ भी प्रीत नहीं है,
ये सब सच है

गीत नहीं है.


लोग मिले कितने अनगाये,
कितने उलझ-उलझ सुलझाये,
कितनी बार डराने पहुंचे, 
आखों तक कुछ काले साये,
जो इन का युगबोध न समझे,
साथी होगा मीत नहीं है,
ये सब सच है

गीत नहीं है.


अपमानों कि सरस कहानी,
जग भर को है याद ज़ुबानी, 
और विजय के उद्घोषों पर,
दुनिया की यूँ आनकानी,
खुद से अलग लड़े युद्धों में जीत मिली, 
पर जीत नहीं है,
ये सब सच है

गीत नहीं है.

शुक्रवार, 10 फरवरी 2012

क्या समर्पित करू - डा. कुमार विश्वास (kya samarpit karoon)

बाँध दूँ चाँद, आँचल के इक छोर में
माँग भर दूँ तुम्हारी सितारों से मैं
क्या समर्पित करूँ  जन्मदिन पर तुम्हें
पूछता फिर रहा हूँ बहारों से मैं


गूँथ दूँ वेणी में पुष्प मधुमास के
और उनको ह्रदय की अमर गंध दूं,
स्याह भादों भरी, रात जैसी सजल
आँख को मैं अमावस का अनुबंध दूं
पतली भू-रेख की फिर करूँ अर्चना
प्रीति के मद भरे कुछ इशारों से मैं
बाँध दूं चाँद, आँचल के इक छोर में
मांग भर दूं तुम्हारी सितारों से मैं



पंखुरी-से अधर-द्वय तनिक चूमकर
रंग दे दूं उन्हें सांध्य आकाश का
फिर सजा दूं अधर के निकट एक तिल 
माह ज्यों बर्ष के माश्या मधुमास का
चुम्बनों की प्रवाहित करूँ फिर नदी
करके विद्रोह मन के किनारों से मैं
बाँध दूं चाँद, आँचल के इक छोर में
मांग भर दूं तुम्हारी सितारों से मैं

चित्र गूगल से साभार लिया गया है और गीत डा. कुमार विश्वास जी के कविता संकलन कोई दीवाना कहता है, जिसका प्रकाशन नये औरवेहतरीन रूप मे फ़्यूजन बुक्स ने किया है से लिया गया है. कुमार विश्वास आज के हिन्दी कवि सम्मेलनो के सबसे ज्यादा पसन्द किये जाने वाले कवि है और अन्तर्जाल पर उनकी लोकप्रियता नये कीर्तिमान कायम कर रही है. उनके बारे मे और जानकारी उनके अन्तर्जाल पते         (www.kumarvishwas.com) पर ली जा सकती है.

रविवार, 30 अक्तूबर 2011

MADHUYAMINI BY DR. VISHWAS...

क्या अजब रात थी, क्या गज़ब रात थी 
दंश सहते रहे, मुस्कुराते रहे 
देह की उर्मियाँ बन गयी भागवत 
हम समर्पण भरे अर्थ पाते रहे 

मन मे अपराध की, एक शंका लिए 
कुछ क्रियाये हमें जब हवन सी लगीं
एक दूजे की साँसों मैं घुलती हुई 
बोलियाँ भी हमें, जब भजन सी लगीं 
कोई भी बात हमने न की रात-भर
प्यार की धुन कोई गुनगुनाते रहे 
देह की उर्मियाँ बन गयी भागवत 
हम समर्पण भरे अर्थ पाते रहे

पूर्णिमा की अनघ चांदनी सा बदन 
मेरे आगोश मे यूं पिघलता रहा 
चूड़ियों से भरे हाथ लिपटे रहे 
सुर्ख होठों से झरना सा झरता रहा 
इस नशा सा अजब छा गया था की हम 
खुद को खोते रहे तुमको पाते रहे 
 देह की उर्मियाँ बन गयी भागवत 
हम समर्पण भरे अर्थ पाते रहे 

आहटों से बहुत दूर पीपल तले
वेग के व्याकरण पायलों ने गढ़े
साम-गीतों की आरोह - अवरोह में
मौन के चुम्बनी- सूक्त हमने पढ़े 
सौंपकर उन अंधेरों को सब प्रश्न हम 
इक अनोखी दीवाली नामाते रहे 
देह की उर्मियाँ बन गयी भागवत 
हम समर्पण भरे अर्थ पाते रहे 

गीत डा. कुमार विश्वास जी के कविता संकलन कोई दीवाना कहता है, जिसका प्रकाशन नये औरवेहतरीन रूप मे फ़्यूजन बुक्स ने किया है से लिया गया है. कुमार विश्वास आज के हिन्दी कवि सम्मेलनो के सबसे ज्यादा पसन्द किये जाने वाले कवि है और अन्तर्जाल पर उनकी लोकप्रियता नये कीर्तिमान कायम कर रही है. उनके बारे मे और जानकारी उनके अन्तर्जाल पते         (www.kumarvishwas.com) पर ली जा सकती है.


सोमवार, 10 अक्तूबर 2011

प्यार नहीं दे पाऊँगा - डा कुमार विश्वास ( pyaar nahee de paaungaa )




ओ कल्पवृक्ष की सोनजुही!
ओ अमलताश की अमलकली
धरती के आतप से जलते
मन पर छाई निर्मल बदली.
मैं तुमको मधुसदगन्ध युक्त संसार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा
तुम कल्पव्रक्ष का फूल और
मैं धरती का अदना गायक
तुम जीवन के उपभोग योग्य
मैं नहीं स्वयं अपने लायक
तुम नहीं अधूरी गजल शुभे
तुम शाम गान सी पावन हो
हिम शिखरों पर सहसा कौंधी
बिजुरी सी तुम मनभावन हो.
इसलिये व्यर्थ शब्दों वाला व्यापार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा.

तुम जिस शय्या पर शयन करो
वह क्षीर सिन्धु सी पावन हो
जिस आँगन की हो मौलश्री
वह आँगन क्या व्रन्दावन हो
जिन अधरों का चुम्बन पाओ
वे अधर नहीं गंगातट हों
जिसकी छाया बन साथ रहो
वह व्यक्ति नहीं वंशीवट हो
पर मैं वट जैसा सघन छाँह विस्तार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा.

मै तुमको चाँद सितारों का
सौंपू उपहार भला कैसे
मैं यायावर बंजारा साँधू
सुर श्रंगार भला कैसे
मै जीवन के प्रश्नों से नाता तोड तुम्हारे साथ शुभे
बारूद बिछी धरती पर कर लूँ
दो पल प्यार भला कैसे
इसलिये विवष हर आँसू को सत्कार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा.


गीत डा. कुमार विश्वास जी के कविता संकलन कोई दीवाना कहता है, जिसका प्रकाशन नये औरवेहतरीन रूप मे फ़्यूजन बुक्स ने किया है से लिया गया है. कुमार विश्वास आज के हिन्दी कवि सम्मेलनो के सबसे ज्यादा पसन्द किये जाने वाले कवि है और अन्तर्जाल पर उनकी लोकप्रियता नये कीर्तिमान कायम कर रही है. उनके बारे मे और जानकारी उनके अन्तर्जाल पते (www.kumarvishwas.com) पर ली जा सकती है .


शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

मेरे मन के गाँव में...

जब भी मुँह ढक लेता हूँ,
तेरे जुल्फों के छाँव  में,
कितने गीत उतर आते है ,
मेरे मन के गाँव में ........

एक गीत पलकों  पे लिखना ,
एक गीत होंठो पे लिखना ,
यानि सारी गीत ह्रदय की ,
मीठी से चोटों पर लिखना,
जैसे चुभ जाता कोई काँटा नंगे पाँव  में,
ऐसे गीत उतर आता, मेरे मन के गाँव में ,

पलके बंद हुई तो जैसे,
धरती के उन्माद सो गये ,
पलके अगर उठी तो जैसे ,
बिन बोले सम्बाद हो गये ,
जैसे धुप, चुनरिया ओढ़े, आ बैठी हो छाँव में,
ऐसे गीत उतर आता, मेरे मन के गाँव में ,  

सोमवार, 19 सितम्बर 2011

लड़कियां जैसे पहला प्यार - Kumar Vishwas New Kavita March (2010) MNNIT Part 8


पल भर में जीवन महकाएं 
पल भर में संसार जलाएं 
कभी धुप हैं, कभी छाँव हैं 
वुर्फ़ कभी अंगार 
लड़कियां जैसे पहला प्यार 

बचपन के जाते ही इनकी 
गंध बसे तन मन में 
एक कहानी लिख जाती हैं 
ये सबके जीवन में 
बचपन की ये विदा निशानी 
यौवन का उपहार 
लड़कियां जैसे पहला प्यार 

इनके निर्णय बड़े अजब हैं 
बड़ी अजब हैं बातें 
दिन की कीमत पर,
गिरबी रख देती हैं रातें 
हंसते-गाते कर जाती हैं 
आंसू का व्यापार
लड़कियां जैसे पहला प्यार 

जाने कैसे, कब कर बैठें 
जान बूझकर भूलें 
किसे प्यास से व्याकुल कर दें 
किसे अधर से छू लें 
किसका जीवन मरुथल कर दें 
किसका मस्त बहार 
लड़कियां जैसे पहला प्यार 

इसकी खातिर भूखी-प्यासी 
दहें रात भर जागें 
उसकी पूजा को ठुकरायें 
छाया से भी भागें 
इसके सम्मुख छुई मुई हैं 
उसको है तलवार 
लड़कियां जैसे पहला प्यार 

राजा के सपने मन में हैं 
और फकीरों संग हैं 
जीवन औरों के हाथों में 
खींची लकीरों संग हैं 
सपनों सी जगमग जगमग हैं 
किस्मत सी लाचार 
लड़कियां जैसे पहला प्यार 

गीत डा. कुमार विश्वास जी के कविता संकलन कोई दीवाना कहता है, जिसका प्रकाशन नये और वेहतरीन रूप मे फ़्यूजन बुक्स ने किया है से लिया गया है. कुमार विश्वास आज के हिन्दी कवि सम्मेलनो के सबसे ज्यादा पसन्द किये जाने वाले कवि है और अन्तर्जाल पर उनकी लोकप्रियता नये कीर्तिमान कायम कर रही है. उनके बारे मे और जानकारी उनके अन्तर्जाल पते         (www.kumarvishwas.com) पर ली जा सकती है . 

रविवार, 14 अगस्त 2011

पल की बात थी - डॉ कुमार विश्वास ( Pal kee baat thee - Dr Kumar Vishwas )



मैं जिसे मुद्दत से कहता था वो पल के बात थी 
आपको भी याद होगा आजकल की बात थी.

रोज मेला जोड़ते थे वे समस्या के लिए 
और उनकी जेब मे ही बंद हल की बात थी.

उस सभा मे सभ्यता के नाम पर जो मौन था 
बस उसी के कथ्य मे मौजूद ताल की बात थी. 

नीतियाँ झूठी पडी घबरा गए सब शास्त्र भी 
झोंपड़ी के सामने जब भी महल की बात थी.

गीत डा. कुमार विश्वास जी के कविता संकलन कोई दीवाना कहता है, जिसका प्रकाशन नये औरवेहतरीन रूप मे फ़्यूजन बुक्स ने किया है से लिया गया है. कुमार विश्वास आज के हिन्दी कवि सम्मेलनो के सबसे ज्यादा पसन्द किये जाने वाले कवि है और अन्तर्जाल पर उनकी लोकप्रियता नये कीर्तिमान कायम कर रही है. उनके बारे मे और जानकारी उनके अन्तर्जाल पते         (www.kumarvishwas.com) पर ली जा सकती है . 

शनिवार, 13 अगस्त 2011

मै तुम्हे ढूंढने - कुमार विश्वास ( main tumhe dhoodhne )



मै तुम्हे ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक गया
रोज़ जाता रहा , रोज़ आता रहा
तुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गई
मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा

ज़िन्दगी के सभी रास्ते एक थे

सबकी मंज़िल तुम्हारे चयन तक रही
अप्रकाशित रहे पीर के उपनिषद्
मन की गोपन कथाएँ नयन तक रहीं
प्राण के प्रश्न पर प्रीति की अल्पना
तुम मिटाती रहीं मै बनाता रहा
तुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गई
मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा

एक खामोश हलचल बनी ज़िन्दगी

गहरा ठहरा हुआ जल बनी ज़िन्दगी
तुम बिना जैसे महलों मे बीता हुआ
उर्मिला का कोई पल बनी ज़िन्दगी
दृष्टि आकाश मे आस का एक दिया
तुम बुझाती रही, मै जलाता रहा
तुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गई
मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा

तुम चली तो गई मन अकेला हुआ

सारी यादों का पुरजोर मेला हुआ
जब भी लौटी नई खुशबूऒं मे सजी
मन भी बेला हुआ तन भी बेला हुआ
खुद के आघात पर व्यर्थ की बात पर
रूठती तुम रही मै मनाता रहा
तुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गई
मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा

मै तुम्हे ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक गया

रोज़ जाता रहा , रोज़ आता रहा
चित्र गूगल से साभार लिया गया है और गीत डा. कुमार विश्वास जी के कविता संकलन कोई दीवाना कहता है, जिसका प्रकाशन नये औरवेहतरीन रूप मे फ़्यूजन बुक्स ने किया है से लिया गया है. कुमार विश्वास आज के हिन्दी कवि सम्मेलनो के सबसे ज्यादा पसन्द किये जाने वाले कवि है और अन्तर्जाल पर उनकी लोकप्रियता नये कीर्तिमान कायम कर रही है. उनके बारे मे और जानकारी उनके अन्तर्जाल पते         (www.kumarvishwas.com) पर ली जा सकती है . 

सोमवार, 1 अगस्त 2011

ओ मेरे पहले प्यार - डा. कुमार विश्वास ( o mere pahale pyaar )



ओ प्रीत भरे संगीत भरे!
ओ मेरे पहले प्यार !
मुझे तू याद न आया कर
ओ शक्ति भरे अनुरक्ति भरे!
नस नस के पहले ज्वार!
मुझे तू याद न आया कर।

पावस की प्रथम फुहारों से
जिसने मुझको कुछ बोल दिये
मेरे आँसु मुस्कानो की
कीमत पर जिसने तोल दिये
जिसने अहसास दिया मुझको
मै अम्बर तक उठ सकता हूं
जिसने खुदको बाँधा लेकिन
मेरे सब बंधन खोल दिये




ओ अनजाने आकर्षण से!

ओ पावन मधुर समर्पण से!
मेरे गीतों के सार
मुझे तू याद न आया कर।

मूझे पता चला मधुरे तू भी पागल बन रोती है,
जो पीङा मेरे अंतर में तेरे दिल में भी होती है
लेकिन इन बातों से किंचिंत भी अपना धैर्य नही खोना
मेरे मन की सीपी में अब तक तेरे मन का मोती है,

ओ सहज सरल पलकों वाले!
ओ कुंचित घन अलकों वाले!
हँसते गाते स्वीकार
मुझे तू याद न आया कर।
ओ मेरे पहले प्यार
मुझे तू याद न आया कर

गीत डा. कुमार विश्वास जी के कविता संकलन कोई दीवाना कहता है, जिसका प्रकाशन नये और वेहतरीन रूप मे फ़्यूजन बुक्स ने किया है से लिया गया है. कुमार विश्वास आज के हिन्दी कवि सम्मेलनो के सबसे ज्यादा पसन्द किये जाने वाले कवि है और अन्तर्जाल पर उनकी लोकप्रियता नये कीर्तिमान कायम कर रही है. उनके बारे मे और जानकारी उनके अन्तर्जाल पते         (www.kumarvishwas.com) पर ली जा सकती है . 

बृहस्पतिवार, 28 जुलाई 2011

Mere man ke gaanv mai


गीत डा. कुमार विश्वास जी के कविता संकलन कोई दीवाना कहता है, जिसका प्रकाशन नये औरवेहतरीन रूप मे फ़्यूजन बुक्स ने किया है से लिया गया है. कुमार विश्वास आज के हिन्दी कवि सम्मेलनो के सबसे ज्यादा पसन्द किये जाने वाले कवि है और अन्तर्जाल पर उनकी लोकप्रियता नये कीर्तिमान कायम कर रही है. उनके बारे मे और जानकारी उनके अन्तर्जाल पते         (www.kumarvishwas.com) पर ली जा सकती है.